बुधवार, 27 जून 2012

Eklavya ki Talaash

आने वाला कल बहुत उज्जवल नज़र आता है 
क्योंकि हर बच्चा product और 
teacher robot नज़र आता है 
डांट दो तो mental torture है 
थप्पड़ मारो तो court  martial  है 
suspend करना कानून के खिलाफ है 
आधुनिक युग के इस सफ़र में 
आदमी ने बहुत कुछ खोया है 
उसे एहसास ही नहीं कि किसी 
अध्यापक ने उसे सवांरा है 
उसकी अनसुलझी पहेलियों को सुलझाया है 
कभी डांट से, कभी प्यार से 
उसकी ज़िन्दगी को निखारा है 

कल के student  का अपना वजूद होगा 
degree  के अलावा 
उसके school  का दिया 
कुछ नहीं होगा  
शिक्षा का ये कैसा 
आधुनिकरण हो गया है 
विद्यार्थी  का ये कैसा मशीनीकरण हो गया है ?
शायद इसी लिए आदमी में बसा इंसान 
सो गया है 

गनीमत है three idiots में केवल 
तीन idiot  ही थे 
यहाँ तो पूरी जनमत तैयार है
उम्मीद अभी भी बाकी है 
मिटी नहीं है आस 
अभी भी मुझे है 
एक एकलव्य की तलाश।
 

ये क्या कर रहे है कपिल जी ?पहले ही CCE SYSTEM लाकर इतनी बड़ी गलती कर बैठे है। हर बच्चा अपना result देख  कर खुशी से झूम  उठा है ।ये तो टीचर ही जानती है कि कैसे उसके F.A.में चार नंबर के आठ किये गए है ।चाहे उसने कोई F.A.का पेपर दिया हो या न दिया हो ,उसे नंबर मिलेंगे ही ।यही नियम बन गया है ।उछल लो बेटा जितना उछलना है ,बारवीं के बोर्ड मेंऐसी मुंह की खाओगे कि बस चारो खाने चित ।देख रहे हो न D.U.की Cut off.सरकारी स्कूल के बच्चे का Drop out ratioतो कम हो गया पर आगे क्या?कालेज लायक नंबर है नही --अब पढ़ -लिख कर मोचीगिरी ,बढ़ई गिरी ,या फिर मेहनत मजदूरी तो होगी नहीं ।फिर क्या करेगा इतना बड़ा युवावर्ग ?चोरी -डकैती -लूटपाट -या फिर किसी आतंकी गुट में शामिल होकर अपना भविष्य उज्ज्वल करेगा?
                                     कपिल जी को इतने से ही चैन नहीं --अब पड़े हैं single testके पीछे ।कभी बच्चे का एक पेपर अच्छा नहीं होता पर दूसरा अच्छा हो जाता हैं ?फिर क्या सारे बोर्ड एक जैसे हैं ?मेरीमानिए कोई फैसला करने से पहले किसी parent और बच्चो की भी सलाह ले लें ।

  शिक्षा ही हैं उन्नति का आधार ,यहीं है भारत का अभिमान                                    भारत का बच्चा ज्ञान मैं है  सर्वशक्तिमान                                                    इस अतुलनीय सम्पति का मत करो अपमान ।                                        

                       









 


मंगलवार, 26 जून 2012

ये  मेरा पहला प्रयास है ।लिखने की बेचेनी जगी क्योकि माही की हत्या को नजर  अंदाज करना नामुमकिन है ।मीडिया कहता है कि प्लाट के मालिक को पकड़कर सजा दो ।लेकिन मेरे भाई क्या दोषी सिर्फ मालिक और ठेकेदार ही है ?उस क्षेत्र का ऍम .अल .ए ,ऍम .सी .डी कमीश्नर ,पुलिस और सबसे बढकर हमारा यह सिस्टम _जहाँ इन्सान की कोई कीमत ही नहीं ।क्या हमारा कानून इन सबको सजा देगा ?
                            पूछती है माही की चीखे हमसे
                             क्या इंसाफ दिला सकोगे
                             या भूल जाओगे कल से ?
                             कब तक हम ध्रतराष्ट्र बने
                              आँखों पर पट्टी बांधे
                             देखेंगे खुद की आत्मा - .जमीर
                             का यूँ बारंम्बार गड्डे में गिरना
                             चीखना तड़पना छटपटाना
                             अखबार की सुर्ख़ियो में पढ़ना
                              सिस्टम को दो गालियाँ देना
                              और फिर चुप्पी साध लेना -----------