मंगलवार, 24 जुलाई 2012

NATIONAL NEWS

देखो कितना बदल गया ये
       इक्कसवी सदी का ज़माना 
नई सोच नई कल्पना 
       नए पैमाने नए शौक 
रूप नया रंग नया 
      ख़बरों का यह  ढंग नया ।
आतंक की पढ़कर खबर 
       दिल दहलता अब नहीं ।

अखबारों की सुर्ख़ियों में 
        रक्त बहा देख कर भी 
दिल पसीजता अब नहीं ।

आतंकवादी के मंसूबे पढ़ 
       योजनाओं की तरकीबें पढ़ 
क्या खाता क्या पीता 
        क्या पढ़ता कैसे जीता 
कैसे अपना समय बिताता 
        सुनकर बड़ा मज़ा है आता 
रस भरी चटपटी ख़बरों से 
         मीडिया हमारा दिल बहलाता ।

देखो कितना बदला ज़माना 
        आतंकवादी का खाना-पीना 
national news  में जगह है पाता ।


बुधवार, 18 जुलाई 2012

नारी तुम केवल श्रद्धा हो -----------

मेयर !पढकर अच्छा लगा !निश्चय ही बधाई की पात्र हैं ।Google में CEO के पद पर इनकी नियुक्ति सच में एक मील का पत्थर है ।इन्होंने सिद्ध कर दिया कि नारी प्रकृति स्वरूपा है ।वह शक्ति -सौन्दर्य और बुद्धि का अदभुत समन्वय है । उम्र और उसकी शारीरिक अवस्था का कोई भी मोड़ उसके आगे बढ़ने में बाधक नहीं है । मेयर से उन स्त्रीयों को (खासकर भारत की ) एक सबक लेना चाहिए , जो समझती हैं कि माँ बनना एक ज़िम्मेदारी का काम है । इस मुकाम पर केवल व्यक्तिगत जीवन को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए । मेयर की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि  कोई भी नारी अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ साथ अपनी professional responsibilities को भी बखूबी निभा सकती हैं ।  मातृत्व जीवन की धारा का एक खूबसूरत पड़ाव है, लेकिन इसे ही अंतिम मंजिल मान लेना मूर्खता है । अब यह कहना कि


                                        नारी तुम केवल श्रद्धा हो
                                                      विश्वास रजत नग पग ताल में
                                         पीयूष स्रोत सी बहा करो
                                                       जीवन के सुन्दर समतल में ।

अब वह केवल श्रद्धा ही नहीं, बुद्धि और प्रगति का भी प्रतीक है । नारी के इस नव रूप को शत शत प्रणाम ।
            अक्सर कहा जाता है कि यदि घर की गृहिणी  यदि पढ़ी-लिखी हो तो समझो सारा खानदान पढ़- लिख गया । मैं कहती हूँ कि  घर की  गृहिणी अगर ऊँचे पदों पर अपना वर्चस्व स्थापित कर ले तो समझो समूचे देश की उन्नति निश्चित है ।
           

                                       देखती हूँ नित प्रतिदिन
                                                 नारी का नव नव उज्ज्वल  रूप
                                         कोई हिलरी क्लिंटन
                                                  तो कोई सुनीता विल्लिंस
                                        तो कोई टेस्सी थोमस
                                                  के पद चिन्हों पर चल रही
                                       देखो यह दुर्गा- स्वरूपा
                                                  नव रूपों में सज रही । 

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

तमसो मा ज्योतिर्गमय 

प्राचीन काल से विश्व के सभी लोग धर्म से बंधे हुए थे । धर्म से ही उनकी ज़िन्दगी संचालित थी । धर्म ही क़ानून था । इसी से समाज में संतुलन कायम रहता था , लेकिन आज क़ानून धर्म से बड़ा हो गया है । क़ानून को तोडा-मरोड़ा जा सकता है , धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता । आज, न तो क़ानून का डर रह गया है , न धर्म का । नतीजा सबके सामने है - बुराई, फरेब , धोखा, भ्रष्टाचार, बेईमानी और लूटपाट आदि इतना बढ़ गया है कि ईमानदारी और सच्चाई से लोगों का विश्वास उठ गया है । 
                           यदि हम वापस धर्म की ओर नहीं मुड़े तो वह दिन दूर नहीं जब चौथा विश्व युद्ध जिसकी केवल अभी आहट ही सुनाई दे रही है , दरवाज़े पर दस्तक देता दिखाई देगा ।

                            धर्म का हाथ पकड़कर
                                        प्रकाश की ओर चलना है हमें
                                                        सत्य  का  हाथ  थामकर
                                                                       ज्योति - पुंज बनना है हमें । 

शनिवार, 7 जुलाई 2012

नूर है वो ----------

मंदिर ले जाती दादी मुझको 
जब कभी-कभार 
God के सामने सर झुकाए 
हाथ जोड़ो प्रसाद  पाओ
कहतीं है ये बार-बार ।

पापा God को बड़ा बताते 
मम्मी God से मन्नत माँगती 
दादा God को फूल चढ़ाते ।
पर आज कुछ ऐसा सुना धमाकेदार 
पापा कहतें God मिल गया 
टी वी के चैनल कहते God ढूँढ लिया 
मैं नन्ही सी जान 
सोचती हूँ बैठ चुप चाप 
क्या सच में सारी दुनिया को 
God मिल गया?

कोई इसे Higgs Boson कहे 
कोई particle 
ये शायद God का अवतार है 
ये नए वाले God क्या 
pollution दूर कर देंगे ?
क्या ये नए वाले 
भ्रष्ट नेताओं को 
सबक सिखा सकेंगे ?
क्या ये नए वाले कसाब को 
फांसी दिला सकेंगे ?
क्या ये नए वाले सरबजीत को वापस ला सकेंगे ?
क्या ये नए वाले 
हमारी बाई के बेटे को भी 
school में दाखिला दिला सकेंगे ?
क्या ये नए वाले 
रुपये की कीमत बढ़ा सकेंगे ?
क्या ये नए वाले 
एक नई दुनिया बना सकेंगे ?
क्या ये नए वाले 
मेरे followers बढ़ा सकेंगे ?

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012


GOD PARTICLE और हमारी आस्था .....



कल ही एक धमाकेदार खबर आई है
वो कहते हैं
कि हमने भगवान् को खोज डाला है
god particle कहते हैं जिसे
जो सृष्टि के कण-कण में बसता  है
आज वर्षों की साधना
और अथक प्रयास के बाद
ढूँढ डाला
उसे
जिसे हम अनश्वर, अविनाशी
शाश्वत और पूर्ण  पुरुष
कहते आयें हैं सदियों से।
पूजते आयें
श्रद्धा और अपनी आस्था का
अर्घ्य देते आये
वही आज वैज्ञानिकों
की शोध संस्थानों का
विषय बन गया है ।

सोचती हूँ
क्या सच में इस खोज ने
रहस्यवाद की परतों को
क्या सच में उघाड़ दिया है?

अपने नवीन प्रयोग से
क्या आज की पीढ़ी
जो फैशन के तहत साईं बाबा और शिव का
tatoo बनवा अपने को 
आस्तिक दिखाती है 
क्या अब Large Hadron Collider का 
तिलक माथे पर लगा घूमेगी?  



गुरुवार, 5 जुलाई 2012

                                    अपनी अपनी सोच -------

एक राजा के मन में ख्याल आया कि एक ऐसा महल बनवाना है जिसे देख सब दांतों तले उंगली दबाने लगे।दूर -दूर से कारीगर ,मिस्र्त्री ,पत्थर ,कालीन ,शीशा आदि मंगवाए गए ।जैसे जैसे महल बनता गया वैसे वैसे उसके चरचे सभी  जगह होने लगे ।    
                 
                      महल बना तो दूर दूर से आम लोग ,बड़े -छोटे राजा -महाराजा ,राजकुमार ,सेनापति आदि उसे देखने आने लगे ।सारे आते और महल की खूब प्रशंसा करते ।चारों ओर केवल महल की ही चर्चा थी ।राजा को प्रशंसा सुनने मैं मजा आने लगा ।एक तरह से उसे इसका नशा हो गया । महीनों बीत गए धीरे--धीरे लोग आने कम हो गए। राजा उदास रहने लगा । उसका खाना-पीना कम हो गया। एक दिन उसके राज्य का एक बहुत बड़ा कलाकार महल देखने आया। राजा ने बड़े उत्साह से उसे महल दिखाना शुरू किया। बहुत विस्तार से हर चीज़ के बारे में बताने लगा- ये कालीन ईरान से आया है, ये पत्थर जयपुर से आया है, ये रत्न मिस्र से आये हैं.... इस तरह से पाँच -छह  घंटे लग गए। अंत में राजा का ध्यान गया कि मैं ही बोलता रहा, कलाकार तो कुछ बोला ही नहीं। हूँ - हाँ तक नहीं की।

                         राजा ने कहा ," क्या बात है भई तुम्हे महल पसंद नहीं आया क्या? मैं बोलते -बोलते थक गया, कुछ खाया पीया तक नहीं और तुम चुप रहे। जो भी महल देखने आया वह तारीफ़ करते नहीं थका, और फिर तुम तो इतने बड़े कलाकार हो, तुम्हे तो सुन्दरता की ज़्यादा समझ है।" कलाकार बोला ," महल तो सुन्दर है पर मेरे मन में एक ही बात घूमती रही कि  महल का प्रवेश द्वार कितना छोटा बनवाया है।"

                          राजा बोला तो क्या हुआ? कलाकार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि बस मैं तो यही सोच रहा था कि कल पे जब तुम मरोगे, तो तुम्हारी अर्थी कैसे निकलेगी? यह सुनते ही राजा को बहुत  गुस्सा आया । तारीफ़ के तो दो शब्द कहे नहीं और मेरे मरने की बातें कर रहा है? राजा ने उसे जेल में बंद कर दिया।

                            रात के समय सिपाही ने आकर बताया कि  कलाकार की पत्नी आयी है। राजा ने उसे पूरी बात बतायी। यह सुनकर वह  बोली, " महाराज! मेरे पति बहुत सनकी हैं। आपके महल के बारे मैं तो मैंने भी सुना था। मेरी भी बड़ी इच्छा थी उसे देखने की। आप दिल छोटा न करें, मुझे दिखाइए महल। मेरे पति को भला इन चीज़ों की क्या समझ?"

                         राजा को लगा कि  पत्नी समझदार है। वैसे भी आज का दिन बहुत बुरा गया। चलो, इसे ही महल दिखाता हूँ। राजा ने उसे भी सारी  चीज़ें विस्तार से समझाकर दिखाईं। पर उसने देखा कि  पत्नी भी सारे समय चुप रही। राजा चिढ़कर  बोला,"तुम तो कहती थी तुम्हारा पति सनकी  है लेकिन मुझे तो तुम भी सनकी  लग रही हो।"

                        इस पर पत्नी ने कहा, " नहीं राजा! मैं तो बस यह सोच रही थी कि  मेरे पति ने कितनी मूर्खता भरी बात कही। मैं तो कहती हूँ कल पर जब आप  मरोगे तो अर्थी निकालने की क्या ज़रुरत है? यहीं फर्श तोड़कर गाड़  देंगे।" यह सुनते ही राजा आग बबूला हो उठा। उसने उसे भी कैद में   डाल दिया । राजा का मूड बिगड़ गया।
                    सारी  रात राजा को नींद नहीं आई। तारीफ़ सुनने का नशा था। नशे की खुराक न मिले तो नशेड़ी बावला हो जाता  है। सुबह कलाकार का बेटा आया। कहने लगा," माँ-बाप बूढ़े हो गए हैं। उन्हें पता नहीं चलता कि कैसे बात की जाती है। अब उनका दिमाग काम नहीं करता।"

                   बेटे ने महल देखने की इच्छा ज़ाहिर की। लेकिन वही ढाक के तीन पात। बेटा भी कुछ नहीं बोला। राजा के पूछने पर बोला,"माँ-बाप ने कमी तो खूब पकड़ी, पर उपाय मूर्खतापूर्ण बताया। मैं तो कहता हूँ कल पे  जब तुम मरोगे तो न तो दरवाज़ा तोड़ने की ज़रुरत है, न तो फर्श तोड़ने की।  तुम्हारे शरीर के छोटे-छोटे कई टुकड़े करके खिड़की से बाहर फेंक देंगे। मामला ख़त्म।"

                     अब आप बताइए कि क्या सच में नई  पीढ़ी के नौजवान  ने येही उत्तर दिया होगा? राजा का अगला कदम क्या था? यदि कलाकार का पोता आता, तो वह  क्या कहता? आपके उत्तर के इंतज़ार में........