बुधवार, 27 जून 2012

Eklavya ki Talaash

आने वाला कल बहुत उज्जवल नज़र आता है 
क्योंकि हर बच्चा product और 
teacher robot नज़र आता है 
डांट दो तो mental torture है 
थप्पड़ मारो तो court  martial  है 
suspend करना कानून के खिलाफ है 
आधुनिक युग के इस सफ़र में 
आदमी ने बहुत कुछ खोया है 
उसे एहसास ही नहीं कि किसी 
अध्यापक ने उसे सवांरा है 
उसकी अनसुलझी पहेलियों को सुलझाया है 
कभी डांट से, कभी प्यार से 
उसकी ज़िन्दगी को निखारा है 

कल के student  का अपना वजूद होगा 
degree  के अलावा 
उसके school  का दिया 
कुछ नहीं होगा  
शिक्षा का ये कैसा 
आधुनिकरण हो गया है 
विद्यार्थी  का ये कैसा मशीनीकरण हो गया है ?
शायद इसी लिए आदमी में बसा इंसान 
सो गया है 

गनीमत है three idiots में केवल 
तीन idiot  ही थे 
यहाँ तो पूरी जनमत तैयार है
उम्मीद अभी भी बाकी है 
मिटी नहीं है आस 
अभी भी मुझे है 
एक एकलव्य की तलाश।
 

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