मंगलवार, 21 अगस्त 2012

kuchh sachee kuchh jhudhee

कुछ  सच्ची कुछ झूठी -------


एक  सम्राट  अपने  मंत्री  पर नाराज  हो  गया । उसे  मृत्यु  दंड  दे डाला । नियम  था  कि  मृत्यु  दंड  हो  तो 

एक  दिन  पहले सम्राट  स्वयं  मिलने  आता था । फिर  इस  मंत्री ने तो  बड़ी सेवाएँ  की थीं । राजा अब मन -ही -मन पछता  भी  रहा  था ,लेकिन  अब बात  पलटना  संभव नहीं था ।सम्राट  जेलखाने  आया  मिलने , बाहर 
घोड़ा बांध  दिया ।मंत्री  से कहा  कुछ भी  मांगना  हो  तो  मांग  लो । तुम्हारी  इच्छा  जरुर  पूरी करूंगा । मंत्री  दहाड़े मार कर रोने  लगा ।  सम्राट  बोले -तुम और  रोते हो ? तुम जैसा शूरवीर  मैंने  नहीं देखा ।तुम  मौत से डरो ,यह  तो  मैंने  कभी  सोचा  ही  नहीं  था ।
                मंत्री ने कहा -मौत से कौन डर  रहा  है  मालिक ,मैं  किसी  और बात  के लिए रो  रहाहूँ ।
      सम्राट ने पूछा -वह  कौन  सी बात  है ,मैं  पूरी  करूंगा ।
                   मंत्री ने कहा कि  नहीं  आप पूरी न कर सकेंगे ।
सम्राट ने बताने की बहुत जिद की तो मंत्री ने बताया कि जिस घोड़े पर सम्राट आया है ,उसी के कारण वह रो रहा है ।
            सम्राट -पागल हो गए हो ?घोड़े के लिए क्यों रोओगे ?
    मंत्री ने कहा -जीवन भर मैं इस जाति  के घोड़े की तलाश करता रहा । मैंने अपने गुरु से बारह सालो तक घोड़ो को आकाश में उड़ाने की कला सीखी थी ।मगर एक ख़ास जाति का घोड़ा ही उड़ सकता है ।आज जब मरने में केवल चोबीस घंटे बचे हैं ,तब यह घोड़ा मुझे दिखाई पडा ।जिन्दगी भर इसकी तलाश करता रहा ।आज आप इस पर बैठ कर मुझे जलाने आए हैं ?
     सम्राट के मन में इच्छा जगी कि  काश वह यह चमत्कार कर सकता । उसने पूछा -कितना समय लगेगा घोड़े को उड़ना सिखाने में ?
   मंत्री ने कहा -एक  वर्ष ।
          सम्राट-तुम्हें मैं एक वर्ष का समय देता हूँ ।अगर घोड़ा उड़ना सीख गया तो तुम्हारा म्रत्यु दंड रद्द ,नहीं तो एक साल बाद मौत ।
            मंत्री खुशी -खुशी घर आ गया ।पत्नी ने कहा -साल के बाद क्या होगा ?मंत्री -घोड़ा तो उड़ेगा नहीं ,यह तो पक्का है ।मगर और  बहुत कुछ हो सकता है ।राजा मर सकता है ,मैं मर सकता हूँ ,घोड़ा मर सकता है ।
    एक साल होते -होते राजा ही नहीं मरा ,घोड़ा ही नहीं मरा ,मंत्री भी मर गया ।
               जिन्दगी बिलकुल पानी की धार की तरह है ।हम इसी पर पैर जमाए रखना चाहते हैं ।
                                
                   जिन्दगी को जी लो जीभर 
                                  कहाँ कब चुक जाए  किस को पता 
                                                    कहाँ कब बह चले किस को पता ?

सोमवार, 20 अगस्त 2012

chand ki sharart

चाँद  की  शरारत ----------

अक्सर ऱोज शाम मेरे बरामदे 

चाँद ताका -झांकी किया करता है 

कभी दरवाजे की दरारों 

कभी खिड़की के शीशों 

ओर  कभी छत से लटक 

कभी आड़ा  -तिरछा  हो 

बिजली  के खम्भे  के पीछे से 

इशारे  किया  करता  है 

कल तो  सारी  हया  शर्म भुला 

आ  गया  भिक्षुक  सा 

सीढ़ियों पर  दबे  पाँव 

पीछे -पीछे  अमावस  आई 

ओर  झट  से  ढ्प्पा  कर  दिया 

अब  ना  जाने  कब चाँद  

की  बारी  आयेगी ।

शनिवार, 18 अगस्त 2012

bhagya vidhata

गुरु जो खोजन  मैं चला ----------

गुरु ब्रह्मा ......।गुरु तो बीज है ।पहली बार जब गुरु से मिलना होता है ,तो सब मंदिर -मस्जिद फीके पड़ जाते 
हैं ।तब पहली बार जीवंत सत्य से मुलाक़ात होती है ।लगता है कि बस अब तो परमात्मा से मिलन दूर नहीं ।
सच्चा गुरु खोजो ।हम ऐसे मूर्ख है कि पंडितो -ज्योतिषों की खोज में आधा जीवन गुजार देते हैं।                                                    

          एक बहुत बड़ा ज्योतिष रात आकाश के तारो का अध्ययन करता हुआ चला जा रहा था ,एक कुएँ में गिर पड़ा ।
ऑंखें आकाश में अटकी थीं ।किसी गहरी खोज में डूबा था ।गिरा तो चिल्लाने लगा ।पास के झोपड़े में रहने वाली बुढ़िया ने बड़ी मुश्किल से निकाला ।वह देश का सबसे बड़ा ज्योतिषी था ।राजा -महराजा उसके पास आते थे ।
                        उसने बुढ़िया का बहुत -बहुत धन्यवाद किया और कहा कि देख तुझे पता नहीं कि  तुझे सौभाग्य से किसको बचाने का अवसर मिला है। मनुष्य के भाग्य से उनके संबंध में मुझसे बड़ा जानकारपृथ्वी पर कोई नहीं ।मेरी फीस भी बहुत ज्यादा है ।लेकिन तुने मुझे बचाया है तो तेरा भाग्य मैं बिना फीस के देख लूंगा ,तू कल आ जाना ।
                            वह बुढ़िया हंसने लगी ।ज्योतिषी ने हँसने का कारण पूछा ।उसने कहा मैं इसलिए हंसती हूँ कि जिसे सामने कुआँ नहीं दिखाई पड़ता ,उसे चाँद -तारे -मेरा भविष्य ----------।अपने पैर संभालने आए नहीं ,तू मेरा भविष्य बताएगा ? होश में  आ । 
                                   
                                       गुरु मिल जाए तो भाग्य बदल देंगे अपना 
                                                           बंदगी अपनी जो करता तो  खुदा हो  जाता 
                                                                                     इसका फैसला मेरे दिल  पर छोड़  दो 
                                                                                                  किसकी मैं बंदगी करूँ कोन मेरा खुदा बने।

गुरुवार, 16 अगस्त 2012

Liz Taylor

एलिजाबेथ टेलर और इश्क का जुनून 

सुना है एलिजाबेथ बहुत सुंदर थी ।शायद रिचर्ड के लिए संसार की सबसे खुबसूरत प्रेमिका ।इन दोनों की प्रेम -कहानी लैला -मजनू की याद दिलाती है ।शादी -तलाक फिर शादी फिर तलाक ओर फिर मिलन ।ऐसा मिलन जो अध्यात्म की ओर ले जाता है ।एक बार मजनू से अल्ला मियां ने मिलने की इच्छा जाहिर की ,मजनू ने कहा -जिसे मिलना है ,मजनू बन कर आ जाए ।
                        
                   अब क्या रंग लाएगी ये डायरी 
                                अब कौन  सा नया  इतिहास 
                                              रचेगे ये इश्क के नए पन्ने 
                                                           जूनून का कैसा सेलाब  आएगा 
                                                                          गलियों -कुचों  में  गूंजेंगी 
                                                                                                इश्क की  ये  शायरी --------------

बुधवार, 15 अगस्त 2012

चाँद की गली में ------

अचानक नुक्कड़ से आव़ाज एक आई 
चरमराती खिड़की से झाँक 
मंगल की पुकार इक आई ।

इशारों -इशारों मैं तय कर लिया 
बस उस मोड़ रुख कर लिया 
घुप्प अँधेरे में सीढ़ियाँ चढ़ 
मिचमिचाती आँखों से टटोलते 
गिरते -पड़ते मुख्य द्वार पर 
जब दस्तक दे डाली 
बांहें पसारे स्वागत 
कर रहा था कोई 
अंदर आने का निमंत्रण 
दे रहा था कोई ।

हर कमरे को परखना है अब 
हर कोने से पहचान बढ़ानी है 
aliens को मित्र बनाना है ।
इक नया इतिहास रचाना है ।
इस ग्रह को अपना गृह बनाना है 


चाँद की गली में ------

मंगल के घर की ओर 
रुख कर लिया 
गली -गली मोड़ते -मुड़ते 
घुप्प अँधेरे में सीढीयां चढ़ 
मिचमिचाती आँखों से टटोलते 
गिरते -पड़ते मुख्य द्वार पर 
इशारों -इशारों में तय कर लिया 
दस्तक जब दे डाली
 बाँहें पसारे स्वागत 
कर रहा था कोई ।

हर कमरे को परखना है अब 
हर कोने से पहचान बढ़ानी है 
कहते हैं कुछ allains रहते हैं यहाँ 
उनको दोस्त बनाना है ।
चाँद की गली में मुड़ते -मुड़ते 
अचानक नुक्कड़ से आवाज इक आई चरमराती खिड़की से झांक 
मंगल की पुकार इक आई 
कुछ अपनी कहेंगे ,कुछ उनकी सुनेंगे ।
एक नया इतिहास रचेंगे ।
मंगल ग्रह को अपना गृह बनाएंगे ।