गुरु जो खोजन मैं चला ----------
गुरु ब्रह्मा ......।गुरु तो बीज है ।पहली बार जब गुरु से मिलना होता है ,तो सब मंदिर -मस्जिद फीके पड़ जाते
हैं ।तब पहली बार जीवंत सत्य से मुलाक़ात होती है ।लगता है कि बस अब तो परमात्मा से मिलन दूर नहीं ।
सच्चा गुरु खोजो ।हम ऐसे मूर्ख है कि पंडितो -ज्योतिषों की खोज में आधा जीवन गुजार देते हैं।
एक बहुत बड़ा ज्योतिष रात आकाश के तारो का अध्ययन करता हुआ चला जा रहा था ,एक कुएँ में गिर पड़ा ।
ऑंखें आकाश में अटकी थीं ।किसी गहरी खोज में डूबा था ।गिरा तो चिल्लाने लगा ।पास के झोपड़े में रहने वाली बुढ़िया ने बड़ी मुश्किल से निकाला ।वह देश का सबसे बड़ा ज्योतिषी था ।राजा -महराजा उसके पास आते थे ।
उसने बुढ़िया का बहुत -बहुत धन्यवाद किया और कहा कि देख तुझे पता नहीं कि तुझे सौभाग्य से किसको बचाने का अवसर मिला है। मनुष्य के भाग्य से उनके संबंध में मुझसे बड़ा जानकारपृथ्वी पर कोई नहीं ।मेरी फीस भी बहुत ज्यादा है ।लेकिन तुने मुझे बचाया है तो तेरा भाग्य मैं बिना फीस के देख लूंगा ,तू कल आ जाना ।
वह बुढ़िया हंसने लगी ।ज्योतिषी ने हँसने का कारण पूछा ।उसने कहा मैं इसलिए हंसती हूँ कि जिसे सामने कुआँ नहीं दिखाई पड़ता ,उसे चाँद -तारे -मेरा भविष्य ----------।अपने पैर संभालने आए नहीं ,तू मेरा भविष्य बताएगा ? होश में आ ।
गुरु मिल जाए तो भाग्य बदल देंगे अपना
बंदगी अपनी जो करता तो खुदा हो जाता
इसका फैसला मेरे दिल पर छोड़ दो
किसकी मैं बंदगी करूँ कोन मेरा खुदा बने।
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