चाँद की गली में ------
अचानक नुक्कड़ से आव़ाज एक आई
चरमराती खिड़की से झाँक
मंगल की पुकार इक आई ।
इशारों -इशारों मैं तय कर लिया
बस उस मोड़ रुख कर लिया
घुप्प अँधेरे में सीढ़ियाँ चढ़
मिचमिचाती आँखों से टटोलते
गिरते -पड़ते मुख्य द्वार पर
जब दस्तक दे डाली
बांहें पसारे स्वागत
कर रहा था कोई
अंदर आने का निमंत्रण
दे रहा था कोई ।
हर कमरे को परखना है अब
हर कोने से पहचान बढ़ानी है
aliens को मित्र बनाना है ।
इक नया इतिहास रचाना है ।
इस ग्रह को अपना गृह बनाना है
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