कहीं पढ़ा था ---------
बेलगाम उड़ती हैं कुछ ख्वाहिशें ऐसे दिल में
मेक्सिंक्न फिल्मों में कुछ दौड़ते घोड़े जेसै
थान पर बांधी नहीं जाती सभी ख्वाहिशें मुझ से
2)- भीगा _भीगा सा क्यों हैं ये अखबार
अपने हाकर को कल से चेंज करो
पाँच सौ गाँव बह गये इस साल ।
3)_ चाँद के माथे पर बचपन की चोट के दाग नज़र आते हैं
रोड़े ,पत्थर और गुलेलों से दिन भर खेला करता था
बहुत कहा आवारा उल्काओं की संगत ठीक नहीं ।
ये तीनों काव्यांश मुझे बेहद पसंद हैं । लिखने वाले ने क्या तो लिखा है । कैसी लगीं बताना -------------।
शायद गुलज़ार ने
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