दौड़ो ----दौड़ो ----बस दौड़ो
एक समय था जब जापान अमेरिका से होड़ के चक्कर में दौड़ रहा था । आज हम सभी दौड़ रहें हैं ।
कोई धन के पीछे दौड़ रहा , कोई नारी के पीछे ,कोई प्रमोशन के पीछे ,कोई दाखिले के लिए सब कुछ
दांव पर लगा रहा है । हालत यह है कि रात दिन काम के दबाव में जी रहे हैं । एक महीने में पूरे
होने वाले काम को दस दिनों में पूरा कर रहें हैं। नतीजा माँ पापा तो काम के बोझ् से दबे हुए हैं ही ,
बच्चों से भी यही चाहने लगे हैं । बच्चा चाहिए आँल - राउंडर । खेल में सचिन होना चाहिए , संगीत में
है तो अ, र, रहमान तो बनो , पढ़ना है तो I I T से कम की तो सोचो ही नहीं । परिणाम मानसिक रोगों
की बढोतरी ।
जापान में इस STRESS के लिए चाय सेरेमनी की जाती है । दो घूंट चाय को एक घंटा
लगा कर पीया जाता है । धीरे -धीरे दिमाग की रफ़्तार धीमी हो जाती है । दिमाग शांत हो जाता है ।
न तो अतीत की खट्टी -मीठी यादें सतातीं हैं , न भविष्य के सपने ही । जापान में इसके अलग से होटल
हैं । एक समय में केवल तीन ही आदमी अंदर जा सकते हैं । आपके ही सामने आराम से पतीली को
साफ़ किया जाएगा , पानी डाल कर उबाला जायगा , पानी के उबलने की आव़ाज को आप सुने , चाय
को बनता देखे --सब कुछ इतना गरिमामय होगा कि आप को उसमे आनन्द आने लगेगा । आप
केवल वर्तमान में जीने लगेगे ।
इसे कहते हैं _ झेन क्रिया ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें