शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

तमसो मा ज्योतिर्गमय 

प्राचीन काल से विश्व के सभी लोग धर्म से बंधे हुए थे । धर्म से ही उनकी ज़िन्दगी संचालित थी । धर्म ही क़ानून था । इसी से समाज में संतुलन कायम रहता था , लेकिन आज क़ानून धर्म से बड़ा हो गया है । क़ानून को तोडा-मरोड़ा जा सकता है , धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता । आज, न तो क़ानून का डर रह गया है , न धर्म का । नतीजा सबके सामने है - बुराई, फरेब , धोखा, भ्रष्टाचार, बेईमानी और लूटपाट आदि इतना बढ़ गया है कि ईमानदारी और सच्चाई से लोगों का विश्वास उठ गया है । 
                           यदि हम वापस धर्म की ओर नहीं मुड़े तो वह दिन दूर नहीं जब चौथा विश्व युद्ध जिसकी केवल अभी आहट ही सुनाई दे रही है , दरवाज़े पर दस्तक देता दिखाई देगा ।

                            धर्म का हाथ पकड़कर
                                        प्रकाश की ओर चलना है हमें
                                                        सत्य  का  हाथ  थामकर
                                                                       ज्योति - पुंज बनना है हमें । 

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